जीवन अप्रत्याशित

“अब और आँखें खुली रखी नहीं जाती। मिनट भर बाद पानी बहने लगता है। बात करने की कोशिश करो तो जबड़े दर्द करते है। सुबह नर्स ने सेलाइन की बोतल चढ़ाई थी, पर यह तरल पदार्थ अंदर जा भी नहीं रहा। माँ को देखने का बड़ा मन कर रहा है। पता नहीं कौन उनका ध्यान…

जीवन से परे

शाम हो चुकी थी। आज भी दफ्तर से निकलने में देर करवा दिया कम्बख्त अफसरों ने। किसी भी तरह दराज़ो को बंध कर के अतुल घर की ओर चल पड़ा। पहले से ऑटो बुला रखा था उसने, बाहर आते ही उस में सवार हो गया। आज अतुल की शादी की दसवीं सालगिरह है। दस साल…

अकेले रह गए

कभी खुश हम भी थे,वो सारे दिन पीछे रह गएएक हम बस अकेले रह गए। कभी इन्तज़ार हम करते थेरात कब ढले, दिन कब हो,इन्तज़ार अब चुनौती बन गएएक हम बस अकेले रह गए। कभी बन-ठन के थे निकलतेकोई काश देखें नज़र घुमाए,अभी सजावट नकाब से बन गएएक हम बस अकेले रह गए। कभी जब…

भुलाया ना गया

“अरे! तू वापस कब आया? दूर से पहचाना ही नहीं जा रहा था। कितने सालों बाद देख रही हूँ तूझे। काफी दुबला हो गया है पहले से। कैसा है तू?” अचानक से आई हुई बातों की बौछार से संभलते हुए उसने कहा –“हाँ। थोड़ा सा वज़न घटाया है। और वैसे सब ठीक ही है। मुझे…

नन्हें जीवन

नन्हे दो पैरों के बल पर,चले होकर वें सवारजिधर जी गया भागे उधर ही,ना माने भीड़, ना कतार। कभी जो गिर पड़े ज़मीन पर,मुँह अपना सकुचातें हैंबिन आँसू के थोड़ा रोते,वापस घर वें आते हैं। घर हैं उनका बहुत विशालछत है, ना दरवाज़े हैं;खिड़कियाँ ना हो चाहे, परचिड़ियों की आवाज़ें हैं। तीन भाई और एक…